भागवत कथा के पांचवें दिन श्री कृष्ण के बाल लीलाओं का हुआ वर्णन- देवी विष्णु प्रिया

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 मैया मोरी मैं नहीं माखन खायो, भागवत कथा में कृष्ण की बाल लीलाओं का हुआ वर्णन



- भागवत कथा के पांचवें दिन श्री कृष्ण के बाल लीलाओं का हुआ वर्णन


- भागवत कथा का श्रवण करने से मनुष्य अमृत हो जाता है-  देवी विष्णु प्रिया 


- भागवत कथा से बड़ा कोई सत्य नहीं है- देवी विष्णु प्रिया


-कथा के अनुसार सजी झांकी रही आकर्षण का मुख्य केंद्र



सोनभद्र। नगर स्थित आर्य समाज मंदिर प्रांगण में सौरभ कुमार भारद्वाज के नेतृत्व व नरेंद्र गर्ग के संयोजन में चल रहे संगीतमय श्रीमद भागवत कथा के पांचवें दिन प्रवचन कर्ता देवी विष्णु प्रिया ने श्री कृष्ण के बाल लीलाओं जिसमें माखन चोरी, कालिया नाग, भगवान कृष्ण का माटी खाना सहित अन्य लीलाओं के कथा का श्रवण  हुए कहा कि धनवान व्यक्ति वही है जो अपने तन, मन, धन से सेवा भक्ति करे वही आज के समय में धनवान व्यक्ति है। परमात्मा की प्राप्ति सच्चे प्रेम के द्वारा ही संभव हो सकती है। उन्होंने पूतना चरित्र का वर्णन करते हुए बताया कि पूतना राक्षसी ने बालकृष्ण को उठा लिया और स्तनपान कराने लगी। श्रीकृष्ण ने स्तनपान करते-करते ही पुतना का वध कर उसका कल्याण किया। माता यशोदा जब भगवान श्री कृष्ण को पूतना के वक्षस्थल से उठाकर लाती है उसके बाद पंचगव्य गाय के गोब, गोमूत्र से भगवान को स्नान कराती है। आगे के प्रसंग में बताया कि पृथ्वी ने गाय का रूप धारण करके श्रीकृष्ण को पुकारा तब श्रीकृष्ण पृथ्वी पर आये हैं। इसलिए वह मिट्टी में नहाते, खेलते और खाते हैं ताकि पृथ्वी का उद्धार कर सकें। गोपबालकों ने जाकर यशोदामाता से शिकायत कर दी–’मां तेरे लाला ने माटी खाई है यशोदामाता हाथ में छड़ी लेकर दौड़ी आयीं। ‘अच्छा खोल मुख।’ माता के ऐसा कहने पर श्रीकृष्ण ने अपना मुख खोल दिया। श्रीकृष्ण के मुख खोलते ही यशोदाजी ने देखा कि मुख में चर-अचर सम्पूर्ण जगत विद्यमान है। आकाश, दिशाएं, पहाड़, द्वीप, समुद्रों के सहित सारी पृथ्वी, बहने वाली वायु, अग्नि, चन्द्रमा और तारों के साथ सम्पूर्णज्योतिर्मण्डल, जल, तेज आदि तत्त्व भी मूर्त दीखने लगे। तब यशोदा मैय्या ने श्री कृष्ण का हाथ पकड़ा तब माता को बड़ा विस्मय हुआ तो श्री कृष्ण ने देखा कि मैया ने तो मेरा असली तत्त्व ही पहचान लिया है। श्री कृष्ण ने सोचा यदि मैया को यह ज्ञान बना रहता है तो हो चुकी बाललीला, फिर तो वह मेरी नारायण के रूप में पूजा करेगी। न तो अपनी गोद में बैठायेगी, न दूध पिलायेगी और न मारेगी। जिस उद्देश्य के लिए मैं बालक बना वह तो पूरा होगा ही नहीं। यशोदा माता तुरन्त उस घटना को भूल गयीं।

देवी विष्णु प्रिया ने आगे कहा कि सदा सुख केवल भगवान के चरणों में है। भगवान के सम्मुख और उनके शरणागत होने को ही भागवत कथा है। भागवत कथा से कल्याणकारी और कोई भी साधन नहीं है इसलिए व्यस्त जीवन से समय निकालकर कथा को आवश्यक महत्व देना चाहिए। भागवत कथा से बड़ा कोई सत्य नहीं है। भागवत कथा अमृत है। इसके श्रवण करने से मनुष्य अमृत हो जाता है। वही प्रवचन कर्ता विष्णु प्रिया एवं दीपा मिश्रा द्वारा भगवान श्री कृष्ण के एक से बढ़कर एक भजनों को गाया गया। इनके साथ आर्गन पर ज्ञानेंद्र दुबे, तबला पर अनुराग झा व पैड पर राकेश ने संगत किया। वही कथा के अनुसार सजाई गई सजीव झांकी में सिवानी पांडे यशोदा बनी, बाल शिव्या, शिव जी प्रिया मिश्रा, यशोदा मईया निकिता खेमका, नाग कन्या पीहू तथा लीला व्यास  ज्ञानेशानन्द ने हनुमानजी व काव्या श्री कृष्ण नाग नथइया के वेश में रही। इस दौरान झांकी में सभी पात्रों ने बहुत ही सुंदर प्रदर्शन किया जो श्रद्धालुओं के आकर्षण का मुख्य केंद्र रहा। कथा का समापन मुख्य यजमान रतन लाल गर्ग और उनकी धर्मपत्नी अनारकली देवी ने व्यासपीठ और भागवत पुराण के पूजन आरती के साथ किया। इस अवसर पर भाजपा जिला अध्यक्ष अजीत चौबे, अविनाश शुक्ला, नरेंद्र गर्ग, कृष्ण कुमार, राजू गर्ग, राधेश्याम, राकेश त्रिपाठी, हर्षवर्धन, अनीता गर्ग, मंजू,  रेनू, सहित भारी संख्या में श्रद्धालुगण उपस्थित रहे।

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