मेहंदीपुर बालाजी : टोडाभीम घाटी में पत्थर गिरने से बड़े हादसे का अंदेशा, अनहोनी के इंतजार में अधिकारी
मेहंदीपुर बालाजी
आस्थाधाम मेहंदीपुर बालाजी को करौली जिले से जोड़ने वाली टोडाभीम घाटी का सफर इन दिनों जानलेवा बना हुआ है। यहां बारिश के कारण पहाड़ी से बड़े पत्थर सड़क पर गिर रहे हैं।
इससे लोगों की जान को खतरा बना हुआ है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी इसकी सुध नहीं ले रहे हैं। इसे लेकर लोगों में विरोध में स्वर उठने लगे हैं। लोग अधिकारी व जनप्रतिनिधियों को कोसते नजर आ रहे हैं। ऐसे में घाटी के चौड़ाईकरण के नाम पर पिछले कई साल में करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
दोनों जिलों को जोड़ती है घाटी
धार्मिक नगरी मेहंदीपुर बालाजी को करौली जिले से जोड़ने के लिए वर्षों पूर्व पहाड़ी को काटकर रास्ता निकाला गया था। जहां दोनों ओर से सड़क निर्माण के बाद घाटी से वाहनों की आवाजाही शुरू हुई थी। पूर्ववर्ती भाजपा सरकार ने आवागमन को सुगम बनाने के लिए घाटी को चौड़ा करने के लिए कई करोड़ रुपए का बजट स्वीकृत किया था जिसमें पहाड़ी को काटकर रास्ता चौड़ा किया गया था, लेकिन बारिश के दिनों में पत्थर नहीं गिरें इसके कोई इंतजाम नहीं किए गए। ऐसे में हर साल जुलाई-अगस्त के महिने में बारिश के दौरान पहाडी के पत्थर सड़क पर गिरते हैं। इससे हादसे की आशंका बनी रहती है।
बारिश के बहाव से सड़क में कटाव
टोडाभीम घाटी में पत्थर गिरने के साथ ही इसके उतार-चढ़ाव के लिए बनी सड़क में भी बारिश के तेज बहाव के कारण कटाव लग गया है। ऐसे में किसी भी वक्त बड़ा हादसा हो सकता है। अनहोनी की आशंका के बावजूद पीडब्ल्यूडी द्वारा सुध नहीं लेने से लोगों में रोष व्याप्त है। सांकरवाडा निवासी राजकुमार ने बताया कि घाटी से रोडवेज बस समेत बालाजी के श्रद्धालुओं व स्थानीय लोगों की बड़ी तादात में आवाजाही रहती है। यहां पूर्व में कई हादसे हो चुके हैं, ऐसे में समय रहते सुध नहीं ली तो बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता।
सोशल मीडिया यूजर अभिषेक नारेडा लिखते हैं, हर साल टोडाभीम घाटी में पत्थर गिरते हैं, अधिकारियों को इंतजार रहता है कब कोई दुर्घटना हो तब वह जागेंगे। आखिर कब तक टोडाभीम क्षेत्र के अधिकारी भगवान भरोसे ही बैठे रहेंगे। इस घाटी में चौड़ाई करण के नाम पर ठेकेदार लाखों रुपए खा चुके हैं। अब इस समस्या का स्थाई समाधान होना चाहिए।


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