मोतिहारी देश में कोरोनावायरस संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए लॉकडाउन लागू कर दिया गया है, लेकिन इससे लाखों दिहाड़ी मजदूर, रिक्शा चालक, गरीबों की जिंदगी मुश्किलों से घिर गई है। हालांकि सरकार की तरफ से मुश्किलों का हल खोजेंगे की हर कोशिश की जा रही है। बावजूद इसके कुछ लोग परेशानियों का हल ढूढ़ने में नाकामयाब होने के बाद अपने अपने घरों की तरफ चल पड़े हैं। ऐसा ही एक परिवार बिहार के मोतिहारी जिले के हरेंद्र महतो का है। हरेंद्र पूरा कुनबा लेकर दिल्ली से मोतिहारी के लिए बुधवार को ही निकल पड़े हैं। उनके साथ पांच और परिवार हैं। तीन रिक्शों पर सवार हरेंद्र अपने परिवार के सदस्यों और कुनबे के साथ सामान लादकर गांव की तरफ चल पड़े हैं। पांच परिवारों की समूची गृहस्थी तीन रिक्शों पर सिमट गई है। गिरिधारी ने आगे बताया कि रिक्शा चलता रहा तो पांच से सात दिन लग हीं जाएंगे यहां आने में और अगर रोक लिया गया तो फिर भगवान ही मालिक। अभी फिलहाल उनके पास दो दिन के खाने का सामान है। बता दें कि दिल्ली से मोतिहारी की दूरी लगभग एक हजार किलोमीटर है। हरेंद्र कितने दिनों में पहुंचेंगे, कहना मुश्किल है, लेकिन ये सिर्फ हरेंद्र की कहानी नहीं है। दूसरे राज्य कमाने आए हर लोगों की लगभग यही कहानी है। घरों से सैकड़ों किलोमीटर दूर रहने वाले हजारों मजदूरों के सामने रोजी-रोटी की समस्या आन पड़ी है। दिल्ली की सड़कों पर काम नहीं और घर लौटने के लिए कोई साधन नहीं है। ऐसे में मजदूरों के लिए एक तरफ कुआं तो दूसरी तरफ खाई की स्थिति है। मरता क्या न करता, जैसे-तैसे घर वापसी के लिए लोग चल पड़े हैं।
मोतिहारी देश में कोरोनावायरस संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए लॉकडाउन लागू कर दिया गया है, लेकिन इससे लाखों दिहाड़ी मजदूर, रिक्शा चालक, गरीबों की जिंदगी मुश्किलों से घिर गई है। हालांकि सरकार की तरफ से मुश्किलों का हल खोजेंगे की हर कोशिश की जा रही है। बावजूद इसके कुछ लोग परेशानियों का हल ढूढ़ने में नाकामयाब होने के बाद अपने अपने घरों की तरफ चल पड़े हैं। ऐसा ही एक परिवार बिहार के मोतिहारी जिले के हरेंद्र महतो का है। हरेंद्र पूरा कुनबा लेकर दिल्ली से मोतिहारी के लिए बुधवार को ही निकल पड़े हैं। उनके साथ पांच और परिवार हैं। तीन रिक्शों पर सवार हरेंद्र अपने परिवार के सदस्यों और कुनबे के साथ सामान लादकर गांव की तरफ चल पड़े हैं। पांच परिवारों की समूची गृहस्थी तीन रिक्शों पर सिमट गई है। गिरिधारी ने आगे बताया कि रिक्शा चलता रहा तो पांच से सात दिन लग हीं जाएंगे यहां आने में और अगर रोक लिया गया तो फिर भगवान ही मालिक। अभी फिलहाल उनके पास दो दिन के खाने का सामान है। बता दें कि दिल्ली से मोतिहारी की दूरी लगभग एक हजार किलोमीटर है। हरेंद्र कितने दिनों में पहुंचेंगे, कहना मुश्किल है, लेकिन ये सिर्फ हरेंद्र की कहानी नहीं है। दूसरे राज्य कमाने आए हर लोगों की लगभग यही कहानी है। घरों से सैकड़ों किलोमीटर दूर रहने वाले हजारों मजदूरों के सामने रोजी-रोटी की समस्या आन पड़ी है। दिल्ली की सड़कों पर काम नहीं और घर लौटने के लिए कोई साधन नहीं है। ऐसे में मजदूरों के लिए एक तरफ कुआं तो दूसरी तरफ खाई की स्थिति है। मरता क्या न करता, जैसे-तैसे घर वापसी के लिए लोग चल पड़े हैं।
[Important News]$type=slider$c=4$l=0$a=0$sn=600$c=8
अधिक खबरे देखे .
-
पठानकोट के सैली रोड में महादेव क्लब की ओर से करवाया गया 9वां वार्षिक भंडारा पठानकोट, मार्च (दीपक महाजन) – पठानकोट शहर के सैली रोड पर महादेव...
-
सरैयाहॉट प्रखंड के रहने वाले नितेश मिश्रा ने उपायुक्त राजेश्वरी बी को फेसबुक के माध्यम से बताया था कि लॉकडाउन के दौरान उनके घर मे नही हो...
-
बॉलीवुड का हमारे जीवन पर गहरा असर है, हर कोई कम समय में कम मेहनत करके फेमस होना चाहता है। इंस्टाग्राम पर करोड़ो लोग रोज़ाना अपने दिनचर्या क...
-
देवघर: कोरोना वायरस के बढ़ते प्रसार को देखते हुए झारखण्ड में इसकी रोकथाम हेतु कड़े समाजिक अलगाव के उपाय को अपनाने हेतु लाॅक डाउन की घोषणा की...
-
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस लैंगिक समानता वर्ष के रूप में मनाया जाएगा : प्रतिभा देवी - प्रकृति विधान फाउंडेशन द्वारा आयोजित हुआ कार्यक्रम। -सा...
-
जसवां काँगड़ा :-हिमाचल प्रदेश के उद्योग व परिवहन मंत्री श्री विक्रम ठाकुर की कड़ी भर्त्सना करते हुए सुरेंद्र मनकोटिया ने कहा की पूर्व राष्ट...
-
ਬਟਾਲਾ 24 ਦਸੰਬਰ (ਨੀਰਜ ਸ਼ਰਮਾ/ਪੱਡਾ/ਵਿੱਕੀ ) ਕੈਬਨਿਟ ਮੰਤਰੀ ਸ੍ਰ ਤ੍ਰਿਪਤ ਰਜਿੰਦਰ ਸਿੰਘ ਬਾਜਵਾ ਜੀ ਦੀ ਰਹਿਨੁਮਾਈ ਹੇਠ ਬਟਾਲਾ ਸ਼ਹਿਰ ਦੇ ਹੋ ਰਹੇ ਧੜਾਧੜ ਵਿਕਾਸ ਦੇ ...
-
*आधे-अधूरे स्पीड ब्रेकरो से हो रही दुर्घटनाये* सिवनी जिला के थाना लखनवाडा़ से महज 50मीटर की दूरी पर बेनगंगा फ्लाई ओवर ब्रिज के पास बने स...
-
आशीष रावत मध्यप्रदेश - जरूरतमंद परिवारों को राशन दुकानों से खाद्यान्न वितरण किया जा रहा है। हर उपभोक्ता का बायोमीट्रिक मशीन में अंगूठा लेना ...
-
वर्षा के मौसम में ही,पानी को तरशे कस्बा बाँसी के बशिन्दे कस्बा बाँसी लगभग 20000 आबादी का नेशनल हाइवे पर स्थित कस्बा है, कस्बे में आज भी नल...
COMMENTS