India Corona Virus Case

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साल 2020 में कोरोना ने बना लिया अपना अलग रूप नाम है स्ट्रेन।

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 साल 2020 को पूरी तरह अपने शिकंजे में लेने वाली कोरोना वायरस या कोविड-19 वायरस के हालिया सप्ताहों में तीन नए प्रकार सामने आए हैं। इसमें से कुछ की संक्रामकता पहले के वायरस के मुकाबले 70 फीसदी तक अधिक है, जिसके चलते पूरी दुनिया में नया भय व्याप्त हो गया है।




वायरस समय के साथ बदलते और म्यूटेट होते रहते हैं। यह एक प्रक्रिया है जो तब होती है जब वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक प्रसारित होता रहता है। आम तौर पर इस प्रक्रिया में कुछ महीनों का समय लगता है। इसीलिए वैज्ञानिक कोरोना के नए प्रकार को देखकर हैरान नहीं हैं।ऐसे में जब इस बात का अनुमान लगाना काफी कठिन है कि वायरस में नया म्यूटेशन कहां होगा, अभी तक ऐसा कुछ भी नहीं पाया गया है जिससे म्यूटेशन को रोका जा सके और वायरस के अधिक जानलेवा बनने या उसके वैक्सीन को ही बेअसर करने की स्थिति में पहुंचने से बचा जा सके।  


हाल के दिनों में कोरोना वायरस के तीन नए स्ट्रेन पाए गए हैं। इनकी पहचान ब्रिटेन, दक्षिण अफ्रीका और नाइजीरिया में हुई है। ब्रिटेन में पाए गए स्ट्रेन को वीयूआई-202012/01 नाम दिया गया है। ब्रिटेन के कई हिस्सों में इस स्ट्रेन से संक्रमित होने वाले मामलों की संख्या तेजी से बढ़ी है।


इसके चलते चिंताएं इस कदर बढ़ गई हैं कि भारत समेत कई देशों ने ब्रिटेन के लिए यात्रा पर ही अस्थाई प्रतिबंध लगा दिया है। साथ ही ब्रिटेन में भी कठिनतम स्तर के प्रतिबंध लागू किए गए हैं। आइए जानते हैं कि दुनिया के सामने अभी तक इस नए स्ट्रेन के बारे में क्या-क्या जानकारी आई है।

यह वायरस के अन्य रूपों की बहुत तेजी से जगह ले रहा है, अर्थात यह तेजी से फैल रहा है। 

इसमें ऐसे म्यूटेशन हैं जो वायरस के हिस्से को प्रभावित करते हैं, जो महत्वपूर्ण हैं। 

इनमें से कुछ म्यूटेशन ऐसे हैं जो कोशकाओं को ज्यादा संक्रमित करने की क्षमता रखते है।

हालांकि, अभी भी इस मामले में वैज्ञानिक पूरी तरह से निश्चित नहीं हैं। बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार कोविड-19 जीनोमिक्स यूके कन्सोर्टियम के प्रोफेसर निक लोमान का कहना है, इन सभी के बारे में पक्की जानकारी के लिए प्रयोगशालाओं में प्रयोग किए जाने की जरूरत है, लेकिन क्या आप इसके परिणाम के लिए हफ्तों या महीनों का इंतजार कर सकते हैं? शायद इन परिस्थितियों में तो नहीं।'

कितनी तेजी से फैल रहा है नया स्ट्रेन?

ब्रिटेन में कोरोना के नए स्ट्रेन की पहचान सबसे पहले सितंबर में हुई थी। नवंबर में लंदन के करीब एक चौथाई मामले नए स्ट्रेन से संक्रमण के थे। वहीं, दिसंबर के मध्य तक यह संख्या दो तिहाई हो गई थी।  ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के अनुसार वायरस का यह नया प्रकार पहले के मुकाबले 70 फीसदी तक अधिक संक्रामक है। 


इस बारे में इंपीरियल कॉलेज लंदन के डॉ. एरिक वोल्ज कहते हैं, 'अभी इस बारे में कुछ कहना जल्दबाजी होगी... लेकिन जो हम देख रहे हैं उससे पता चलता है कि यह बहुत तेजी से फैल रहा है। यह पहले के प्रकारों के मुकाबले काफी तेजी के साथ फैल रहा है, लेकिन जरूरी है कि इस पर नजर बनी रहे।'

कितना फैल गया है कोरोना का नया स्ट्रेन?

माना जा रहा है कि नया स्ट्रेन या तो ब्रिटेन के ही किसी मरीज में उत्पन्न हुआ होगा या किसी अन्य देश से आया होगा। इसे उत्तरी आयरलैंड के अलावा पूरा लंदन में पाया गया है, लेकिन लंदन, दक्षिण-पूर्वी और उत्तरी ब्रिटेन में इससे संक्रमित मामले सबसे ज्यादा हैं। पूरी दुनिया में वायरस सैंपल के जेनेटिक कोड्स पर नजर रखने वाले संगठन नेक्स्टस्ट्रेन के अनुसार, डेनमार्क और ऑस्ट्रेलिया में ब्रिटेन से आए मामले पाए गए हैं। नीदरलैंड में भी मामले मिले हैं। दक्षिण अफ्रीका में भी कोरोना वायरस का एक नया स्ट्रेन मिला है जिसमें ब्रिटेन जैसे ही कुछ म्यूटेशन मिले हैं लेकिन उससे अलग है। 

क्या ऐसा पहले भी हो चुका है?

जी हां, इस वैश्विक महामारी के केंद्र चीन के वुहान में जिस वायरस की सबसे पहले पहचान हुई थी, पूरी दुनिया में फैसे वायरल से वह अलग है। फरवरी में यूरोप में एक म्यूटेशन की पहचान की गई थी। इसे डी614जी नाम दिया गया था। इसके अलावा एक म्यूटेशन यूरोप में पाया गया था, जिसे ए222वी नाम दिया गया था। 

नए म्यूटेशन के बारे में हम क्या जानते हैं?

वायरस के नए प्रकार के बारे में एक शुरुआती विश्लेषण प्रकाशित हो चुका है। इसमें 17 तरह के महत्वपूर्ण परिवर्तनों की पहचान होने की बात कही गई है। वायरस के स्पाइक प्रोटीन में बदलाव आया है। आपको बता दें कि वायरस पर मौजूद स्पाइक प्रोटीन एक तरह की चाबी होते हैं जो मानव शरीर की कोशिकाओं में वायरस के प्रवेश के लिए रास्ता तैयार करते हैं।


एक म्यूटेशन स्पाइक के सबसे महत्वपूर्ण हिस्से 'रिसेप्टर बाइंडिंग डोमेन' को बदलता है। इस म्यूटेशन को एन501वाई कहा गया है। प्रो, लोमान के अनुसार यह काफी अहम है। एक अन्य म्यूटेशन एच69/वी70 है। कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में प्रो. रवि गुप्ता द्वारा किए गए कार्यों से पता चला है कि इस म्यूटेशन से प्रयोगशालाओं में वायरस की संक्रामकता दो गुना बढ़ी दिखी। 

क्या इससे संक्रमण और घातक हो सकता है?

अभी तक इस बाते के कोई सबूत नहीं मिले हैं कि वायरस का नया प्रकार पहले के मुकाबले अधिक घातक या जानलेवा है। हालांकि, वैज्ञानिकों का कहना है कि निगरानी बहुत जरूरी है। अगर वायरस अधिक घातक नहीं भी है तो भी संक्रामकता बढ़ने से मामलों की संख्या बढ़ेगी और अस्पतालों पर कार्यभार भी बढ़ेगा। 

क्या नए प्रकार पर वैक्सीन काम करेगी

इस बारे में अभी तक वैज्ञानिकों का कहना है कि वायरस पर वैक्सीन पूरी तरह असरदार रहेगी। दरअसल, वैक्सीन हमारे शरीर के इम्यून सिस्टम को इस तरह तैयार करती हैं कि वह वायरस के विभिन्न भागों पर हमला कर उसे नष्ट कर सके। इसलिए अगर स्पाइक का कोई हिस्सा म्यूटेट भी हुआ होगा तो भी वैक्सीन उस पर असर करेगी। हालांकि, प्रो. गुप्ता कहते हैं कि अगर वायरस में और म्यूटेशन हुए तो यह चिंता की बात हो जाएगी।

प्रगति मीडिया ।

क्राइम रिपोर्टर राजेश कुमार।


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साल 2020 में कोरोना ने बना लिया अपना अलग रूप नाम है स्ट्रेन।
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